शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से मचा हड़कंप लगातार निकासी जारी

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अप्रैल 2026 के पहले 10 दिनों में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) ने करीब ₹48,213 करोड़ की भारी निकासी कर ली है। इससे पहले मार्च में भी रिकॉर्ड स्तर पर ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली दर्ज की गई थी, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो माना जा रहा है। फरवरी में आए निवेश के बाद अचानक आई इस तेज गिरावट ने बाजार की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव और आर्थिक अनिश्चितता इस बिकवाली के मुख्य कारण हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक महंगाई की आशंका फिर से बढ़ गई है। इसके साथ ही रुपये की कमजोरी और ऊर्जा संकट ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। यही कारण है कि विदेशी निवेशक अब जोखिम भरे उभरते बाजारों से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

अन्य देशों के बाजारों की ओर बढ़ रहा रुझान
रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी निवेशक अब भारत की बजाय दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। इन देशों में उन्हें बेहतर ग्रोथ संभावनाएं नजर आ रही हैं। इसके मुकाबले भारत के लिए FY27 का ग्रोथ अनुमान थोड़ा कमजोर बताया जा रहा है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है। लगातार हो रही निकासी का असर घरेलू बाजार की धारणा पर भी साफ दिखाई दे रहा है और अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
सीजफायर के बावजूद नहीं मिला बाजार को सहारा
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबर आने के बावजूद बाजार में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों ने इस राहत का फायदा उठाने के बजाय इसे और निकासी का अवसर बना लिया। अब बाजार में सुधार तभी संभव है जब वैश्विक तनाव कम हो, रुपये में स्थिरता आए और कंपनियों के तिमाही नतीजे मजबूत रहें। जब तक ये परिस्थितियां नहीं बदलतीं, विदेशी निवेश का दबाव बाजार पर बना रह सकता है।
